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हमारे देशवासी, “हम" देशवासी

हमारे देशवासी, “हम" देशवासी
कल मेरा मन बहुत दु:खा... जहां केवल नापसंदगी, केवल असहमति काफी है, वहां घृणा के, ऐसी बेमतलब, बेवजह नफरत के बीज क्यों बोते हैं?
शर्म आ रही है, कि "हम" ऐसे हैं...

कुछ अटपटे सवाल, कुछ चटपटे जवाब | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

और हम हुए लाजवाब अनोखे से जवाब होते हैं. कभी हैरान होते हैं, कभी हंसते हैं, और कभी दोनों. जयोम और जयोम की बातें...

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

हा हा हा ये छोटा सा विदूषक हंसाने में बड़ा माहिर होता जा रहा है. बस, कभी कभी खुद समझ नहीं पाता, कि हम इतनी ज़ोर से क्यों हंस रहे हैं.

मेरा प्यारा नन्हा सुधारक | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

ज़रा गलती कर के तो देखो... कहां हम सोचते थे, कि जयोम की गलतियां सुधारकर उसे अच्छा बोलना सिखाएंगे, यहां तो जनाब दो साल के हुए हैं नहीं और अभी से हमारी गलतियां सुधार रहे हैं

मुझे नींद न आए | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

जब आए तो चलो नींद को भगाएं न सोने के और नींद भगाने के ढेर उपाय हैं जयोम के पास. नींद चाहे अपने सारे हथियार अपना ले, जयोम की आखों में नींद भरी होती है, उबासियां भी आतीं हैं,
पर उसके पास तरीके भी शानदार हैं से दुश्मन से निपटने के.

चीज़ों से बतियां | जयोम के मुख से

जानता नहीं कि जान नहीं बेजान चीज़ें कहां सुनेंगीं जयोम की बातें, पर वो फिर भी उनसे बातें करता है.

जयोम मेरा प्यारा रट्टू तोता | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

बिना समझे ही बोले चट पट मेरे नटखट जयोम ने रट्टा लगाया, और सही समय पर (कभी कभी गलत भी) सबको सुनाया

जयोम के मुख से - एक प्यारी सी शुरुअात

मेरे नटखट जयोम के मुख से िनकली प्यारी बतियां बातूनी तो क्या कहूं, अभी तो बोलना सीख ही रहा है. पर इसकी ये सीखने की प्रक्रिया भी बड़ी प्यारी है. सवा साल के थे जनाब, जब पापा-मम्मा के अलावा कुछ शब्दों को अपनी प्यारी आवाज़ में बोलने लगे थे. और अब तो बस पूछो ही मत. कभी अटक अटक कर, कभी धाराप्रवाह वाक्य बोलते हैं जयोम जी. कभी गुस्सा दिखाते हैं, कभी प्यार, कभी रूठ जाते हैं, कभी होती है प्यारी सी मनुहार. और कई बार बस नकल, कभी बिना अकल, कभी डेढ़ अकल के साथ.

थारी म्हारी पंचायत - कुछ मजेदार जुमले चुगलखोरों के

चलो चुगलखोरों की चुगली करें
पंचायती पड़ोसी हों या चुगलखोर रिश्तेदार, निम्न पंचायती जुमलों से आपका भी पाला पड़ा होगा. यदि पढ़ा होगा तो ये पढ़कर हंसी आनी तय है. सुनकर मन में बड़े अच्छे से जवाब आते हैं, जो हम दे नहीं पाते, बस खामोशी से मन ही मन मुस्कुरा देते हैं. अब हमारे मन में जो आता है, हमने तो लिख दिया...

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